સાંજ નો સત્સંગ:: શ્રી ભાસ્કર ભાઈ સાથે
બીનું સત્સંગ વિવેક ન હોઈ l રામ કૃપા બીનું સુલભ ન હોઈ ll
આજ ના સત્સંગ માં સતાર સાહેબ ના દોહા પર શ્રી ભાસ્કર ભાઈ ને સાંભળ્યા. સહજ સમાધિ અને સહજ સત્સંગ એક લહાવો છે.
થયું લાવ આપ સર્વે સાથે દોહા શેર કરું.
अलख के अमल पर चढ़े योगीओ को
जणाये तरण सम जगत बादशाही
अलख के अमल पर.........
अमल कि वो यारों खुमारी ना उतरे
अंदर शहेनशाही को परवा ना कोई
अलख के अमल पर.........
हे तृष्णा भिखारी जो मिले शहेनशाही
न तुटे वहां तक कहां बादशाही
हे शाहों की शाही अदल फकिराइ
सर्व त्याग जिसने तृष्णा मिटाई
अलख के अमल पर.........
कदम पर हे जुगती खलक सारी आई
झुके राव राणा बेतुल बादशाही
जगत जहांगीरी है फिकर जिसने खाई
बना के मुकामों से आशा उठाई
अलख के अमल पर.........
इधर बादशाही उन्हें उधर बादशाही
मीटे खुफियारी इरे मुफलि शाही
न आना न जाना मिटी जंजीताई
फकिरी है ऐसी अदल शहेनशाही
अलख के अमल पर.........
सब है उसी में और वो हे सभी में
नजर एक बिन नहीं दूजे समाई
कहे लाल जिसने मस्ती को पाई
अमर तख्त पर गादी उसने बिसाइ
अलख के अमल पर.........
अलख के अमल पर चढ़े योगीओ को
जणाये तरण सम जगत बादशाही
अलख के अमल पर.........
Comments
Post a Comment